देहरादून। बर्फबारी के चलते हवा में ठंडक बढ़ना तो लाजिमी है, लेकिन प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर भी इसका असर दिखाई देगा। सूबे में बर्फबारी के चलते हिमालय से निकलने वाली नदियों का जलस्तर तो गिरेगा, लेकिन बारिश से इसकी भरपाई की उम्मीद की जा सकती है। असल समस्या यह है कि बर्फबारी से प्रदेश शीत लहर की चपेट में आने लगा है, जिससे राज्य में बिजली की खपत बढ़ना तय है। उत्तर प्रदेश में यदि जमकर बारिश हुई तो रामगंगा प्रोजेक्ट बंद होने से भी सूबे की दिक्कतें बढ़ सकती हैं।मौसम की करवट सूबे की बिजली व्यवस्था पर आगे भी अपना असर दिखा सकती है। पिछले तीन महीने में बढ़ती ठंड से नदियों का जलस्तर गिरा और सूबे का बिजली उत्पादन भी 19 मियू से लुढ़ककर 7 मियू तक पहुंच गया है। हालांकि रामगंगा प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद उत्पादन फिर से 9 व 10 मियू के आसपास लौट आया। पिछले दो-तीन दिनों से ऊंची पहाड़ियों पर बर्फबारी हो रही है। जानकार मानते हैं कि बर्फबारी से नदियों के जलस्तर में आने वाली कमी तो बारिश से पूरी हो जाएगी, लेकिन ठंड बढ़ने से प्रदेश में बिजली की खपत में इजाफा होना तय है। ऐसे में बिजली की डिमांड व सप्लाई के बीच का अंतर भी बढ़ जाएगा। चूंकि रामगंगा प्रोजेक्ट में बिजली का उत्पादन पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में सिंचाई की जरूरत पर टिका है। लिहाजा, यदि उत्तर प्रदेश में ठीक-ठाक बारिश हुई, तो इस प्रोजेक्ट में उत्पादन बंद हो जाएगा। इससे राज्य के बिजली उत्पादन में फिर से करीब तीन मियू की कमी आ जाएगी। ऐसे हालात में ठंड के चलते बढ़ने वाली डिमांड ऊर्जा प्रदेश पर भारी पड़ सकती है। ऊर्जा निगम के निदेशक जेएम लाल बताते हैं कि सर्दियों में किल्लत से निपटने के लिए गर्मियों में की गई 370 मियू की रिजर्व बैंकिंग काम आ रही है। वर्तमान में भी पंजाब, दिल्ली, हरियाणा व गुजरात से बैंकिंग के जरिए बिजली ली जा रही है। इसके अलावा बीएसईएस के साथ हाल ही में हुए एडवांस बैंकिंग एग्रीमेंट से भी प्रदेश को राहत मिलेगी।
