हरिद्वार। हाथियों की संख्या को देखते हुये उत्तराखंड को हाथियों का सबसे बड़ा गढ़ माना जाता है। सूबे के जंगलों में हाथियों का लिंगानुपात 1:2 का है, जबकि नार्थ ईस्ट के जंगलों में एक नर पर 50 से 80 मादाएं हैं लेकिन राज्य के जंगलों में निरंतर हो रही टस्करों की मौत लिंगानुपात गड़बड़ा सकती है। गत दो वर्ष में विभिन्न वजहों से सोलह टस्कर मौत के मुंह में जा चुके हैं।वर्ष 2007 में हुई गणना के मुताबिक उत्तराखंड में 1346 हाथी पाए गए थे। राजाजी नेशनल पार्क में 416, कार्बेट नेशनल पार्क में 622, लैंसडौन वन प्रभाग में 180, हरिद्वार वन प्रभाग में 31, देहरादून वन प्रभाग में 27, रामनगर वन प्रभाग में महज एक, तराई सेंट्रल वन प्रभाग में सात, तराई पश्चिम समेत अन्य क्षेत्रों में एक हाथी की मौजूदगी दर्ज की गई। नार्थ ईस्ट के असम, पश्चिम बंगाल और दक्षिण के कई क्षेत्रों में तस्करों की सक्रियता की वजह से लिंगानुपात में काफी अंतर आया है। तस्करों द्वारा नर हाथी को निशाना बनाने से नार्थ ईस्ट में यह अनुपात एक नर के मुकाबले 50 से 80 मादाओं तक जा पहुंचा है। उत्तराखंड इस मामले में बेहतरीन स्थिति में है। इसकी वजह यहा तस्करों की खास सक्रियता का न होना माना जा रहा है। लिंगानुपात में एक आदर्श स्थिति के बावजूद गत दो वर्ष में सोलह टस्करों की मौत चिंता का विषय बनी हुई है। आंकड़े बताते हैं कि राजाजी नेशनल पार्क में 2007 से 2008 में तीन टस्कर, कार्बेट नेशनल पार्क में पांच, लैंसडौन वन प्रभाग में दो, हरिद्वार में दो, देहरादून, रामनगर, तराई पश्चिम और सेंट्रल में एक-एक कुल सोलह टस्कर प्राकृतिक या अप्राकृतिक मौत के शिकार हो चुके हैं। नर हाथियों की मौत का सिलसिला ऐसे ही चलता रहा तो इससे राजाजी और कार्बेट नेशनल पार्क में हाथी के सेक्स रेशियो पर असर पड़ सकता है। वन्य जीव वैज्ञानिक डा. रितेश जोशी भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं। राज्य वन्य जीव सलाहकार बोर्ड के सदस्य और वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी के प्रदेश प्रभारी राजेन्द्र अग्रवाल कहते हैं कि एक टस्कर की मौत भी काफी अहमियत रखती है। निश्चित रूप से टस्करों के मौत को लेकर वन महकमे को सचेत होना पड़ेगा। राज्य के मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक श्रीकांत चंदोला ने जागरण से बातचीत में कहा कि टस्करों की मौत के मौजूदा आकड़ों से नर और मादा अनुपात में यकायक बदलाव आने की संभावना नहीं है, लेकिन टस्करों की मौत चिंता का विषय है। इसी के मद्देनजर हरिद्वार में रेस्क्यू सेंटर तैयार किया जा रहा है।
